प्रतिबिंब / प्रतिमा - आइने में दिखाई देनेवाली प्रतिमाएँ (आकृतियाँ, अंक, अक्षर)
परिचय
दर्पण प्रतिबिंब वह आकृति है जो किसी वस्तु को आइने में देखने पर बनती है। इसमें वस्तु का बायां हिस्सा दाईं ओर और दायां हिस्सा बाईं ओर दिखाई देता है, जबकि ऊपर और नीचे का हिस्सा स्थिर रहता है।
संकल्पना समझ
दर्पण प्रतिबिंब को समझने के लिए इन चरणों का पालन करें:
1. वस्तु के दाईं ओर एक लंबवत दर्पण की कल्पना करें।
2. वस्तु के हर बिंदु को दर्पण से उतनी ही दूरी पर दूसरी तरफ ले जाएं।
3. याद रखें कि केवल दिशा बदलती है, आकार नहीं।
उप-विषय
आइने में दिखाई देनेवाली प्रतिमाएँ (आकृतियाँ, अंक, अक्षर)
इसके अंतर्गत हम सीखते हैं कि कैसे विभिन्न आकृतियां, गणितीय अंक और अक्षर दर्पण में अपना स्वरूप बदलते हैं।
उदाहरण
उदाहरण 1
वस्तु: अक्षर 'K'
प्रक्रिया: 'K' की खुली भुजाएँ दाईं ओर हैं, दर्पण में वे बाईं ओर दिखाई देंगी।
उत्तर: 'K' का दर्पण प्रतिबिंब 'ꓘ' जैसा दिखेगा।
ट्रिक्स और शॉर्टकट
अंक 0 और 8 दर्पण में बिल्कुल वैसे ही दिखते हैं जैसे वे वास्तव में हैं।
सामान्य गलतियाँ
छात्र अक्सर प्रतिबिंब को उल्टा (ऊपर का नीचे) कर देते हैं। दर्पण प्रतिबिंब में केवल बायां-दायां बदलता है।
अभ्यास प्रश्न
आसान प्रश्न (Easy)
- अक्षर 'O' का दर्पण प्रतिबिंब कैसा दिखेगा?
- संख्या '1' का दर्पण प्रतिबिंब किस दिशा में मुड़ा होगा?
- दर्पण में देखने पर 'A' का आकार बदलेगा या नहीं?
मध्यम प्रश्न (Medium)
कठिन प्रश्न (Hard)
सारांश
दर्पण प्रतिबिंब में पार्श्व परिवर्तन (Lateral Inversion) होता है। वस्तु का बायां भाग दर्पण का दायां भाग बन जाता है।













